साम्राज्य का गुप्त विलोपन: चागोस द्वीप समूह से पूरे समाज के निष्कासन के 10 अध्याय
ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीपवासियों के गुप्त और हिंसक निष्कासन का 10 चरणों में ऐतिहासिक विश्लेषण, अमेरिकी सैन्य अड्डे का निर्माण और आधा सदी लंबा न्याय संघर्ष।

मुख्य बिंदु
- 1965 और 1973 के बीच, ब्रिटिश सरकार ने अमेरिकी सैन्य अड्डे के निर्माण के लिए चागोस द्वीप समूह से लगभग 2,000 मूल निवासियों को बलपूर्वक निर्वासित किया।
- ब्रिटिश राजनयिकों ने चागोसियों को स्थायी आबादी के बजाय 'अस्थायी अनुबंध श्रमिक' बताकर संयुक्त राष्ट्र के गैर-उपनिवेशीकरण चार्टर की जानबूझकर अवहेलना की।
- अमेरिका को डिएगो गार्सिया द्वीप लीज पर देने के बदले में ब्रिटेन ने पोलारिस परमाणु पनडुब्बी प्रणाली पर 1.4 करोड़ डॉलर की गुप्त छूट प्राप्त की थी।
- 2019 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने चागोस पर ब्रिटिश नियंत्रण को अवैध ठहराया, फिर भी द्वीपवासियों की वापसी का अधिकार अब भी अधर में लटका है।
1965 और 1973 के बीच, ब्रिटिश साम्राज्य ने वाशिंगटन के साथ एक गुप्त सैन्य सौदे के तहत हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह की पूरी 2,000-मजबूत स्वदेशी आबादी को धोखे, भुखमरी और सैन्य बल के प्रयोग से बेदखल कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के गैर-उपनिवेशीकरण चार्टर को दरकिनार करने के लिए ब्रिटिश कूटनीतिज्ञों ने एक पूरी आबादी को कागजों पर 'अनुबंध मजदूर' बताकर उनका अस्तित्व ही नकार दिया, उनके पालतू कुत्तों को गैस चैंबरों में मार डाला और इंसानों को पशु-वाहक जहाजों में भरकर मॉरीशस के तटों पर लावारिस छोड़ दिया ताकि पेंटागन डिएगो गार्सिया पर अपना सबसे महत्वपूर्ण विदेशी हमलावर नौसैनिक अड्डा 'कैंप जस्टिस' खड़ा कर सके।
प्रमुख ऐतिहासिक तथ्य
- पीड़ित समाज: चागोसियन (जिन्हें क्रियोल भाषा में इलोइस कहा जाता है), जो कम से कम पाँच पीढ़ियों से 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से चागोस द्वीपसमूह पर बसे हुए थे।
- सामरिक उद्देश्य: डिएगो गार्सिया को निर्जन बनाकर शीत युद्ध और मध्य पूर्व के लिए एक अभेद्य अमेरिकी वायु एवं नौसैनिक अड्डा (कैंप जस्टिस) स्थापित करना।
- गुप्त वित्तीय विनिमय: ब्रिटेन ने अपनी निर्वासित आबादी के बदले संयुक्त राज्य अमेरिका से पोलारिस (Polaris) पनडुब्बी मिसाइल प्रणाली की खरीद पर 1.4 करोड़ डॉलर की गुप्त छूट हासिल की।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 1514 (XV) और 2066 (XX) का खुला उल्लंघन करते हुए मॉरीशस की स्वतंत्रता से पूर्व चागोस को उससे जबरन अलग किया गया।
- न्यायिक स्थिति: 2019 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने व्यवस्था दी कि ब्रिटेन का चागोस पर नियंत्रण एक 'अवैध औपनिवेशिक कृत्य' है और इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
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| चागोस निष्कासन: साम्राज्यवादी विच्छेदन की समयरेखा |
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| 1965: ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी (BIOT) की स्थापना; मॉरीशस का विच्छेदन |
| 1966: अमेरिका-ब्रिटेन गुप्त समझौता: 'केवल पक्षी रहेंगे, कोई टार्ज़न नहीं' |
| 1968-70: द्वीपों की आर्थिक नाकाबंदी; राशन, नमक और दवाओं की आपूर्ति बंद |
| 1971: एडमिरल ब्रूस ग्रेटबैच का आदेश: 1,000+ घरेलू कुत्तों का गैस से नरसंहार |
| 1971-73: 'नॉर्डवेर' जहाज से अंतिम आबादी का मॉरीशस और सेशेल्स में हिंसक निर्वासन |
| 2019: हेग स्थित ICJ द्वारा ब्रिटेन के औपनिवेशिक कब्जे को पूर्णतः अवैध घोषित किया गया |
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1. लैंकेस्टर हाउस का ब्लैकमेल — सितंबर 1965
चागोस द्वीप समूह के उजड़ने की नींव लंदन के लैंकेस्टर हाउस में रखी गई। सितंबर 1965 में, जब मॉरीशस के भावी प्रधानमंत्री सर शिवसागर रामगुलाम स्वतंत्रता की शर्तों पर बातचीत कर रहे थे, ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन ने एक सख्त अल्टीमेटम दिया: यदि मॉरीशस चागोस द्वीपसमूह को ब्रिटेन के हवाले नहीं करता, तो उसे संप्रभुता नहीं दी जाएगी। विल्सन ने उपनिवेश सचिव एंथनी ग्रीनवुड को निर्देश दिया था कि वे रामगुलाम को यह स्पष्ट कर दें कि वे बिना चागोस को छोड़े खाली हाथ लौटेंगे।
ब्रिटिश सरकार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 1514 की जानबूझकर अवहेलना की, जो किसी भी औपनिवेशिक क्षेत्र को स्वतंत्रता देने से पहले उसके विच्छेदन (dismemberment) पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाता था। मॉरीशस को महज 30 लाख पाउंड की क्षतिपूर्ति राशि देकर चागोस को उससे जबरन अलग कर दिया गया। इस प्रशासनिक चोरी ने एक नए औपनिवेशिक निर्माण को जन्म दिया: ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी (BIOT)। इस पूरी प्रक्रिया में चागोस के उन बाशिंदों से एक बार भी परामर्श नहीं किया गया, जिनकी पीढ़ियाँ इन एटोलों पर जन्मी और दफन हुई थीं।
"क्या मैं मॉरीशस के प्रतिनिधिमंडल को यह संकेत दे सकता हूँ कि वे चागोस द्वीप समूह को ब्रिटेन को सौंपे बिना स्वतंत्रता की आशा न करें?"
— हेरोल्ड विल्सन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री, कैबिनेट मिनट (23 सितंबर 1965)
यह क्यों महत्वपूर्ण है: इसने यह साबित कर दिया कि वि-औपनिवेशीकरण (decolonisation) की आड़ में ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए पश्चिमी सैन्य विस्तार के लिए नए सिरे से साम्राज्यवादी सीमाएं खींचीं।
2. काल्पनिक कानूनी झूठ: 'अनुबंध मजदूर' का गढ़ा गया मिथक — 1965–1966
चागोसियों को उनकी अपनी ज़मीन से बेदखल करने के लिए व्हाइटहॉल ने एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल चली। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जांच और संयुक्त राष्ट्र के गैर-स्वायत्त क्षेत्रों की सूची (अनुच्छेद 73) से बचने के लिए, ब्रिटिश विदेश और राष्ट्रमंडल कार्यालय (FCO) ने एक झूठा कानूनी आख्यान तैयार किया: चागोस में कोई स्थायी स्वदेशी आबादी नहीं है।
आधिकारिक फाइलों में यह दर्ज किया गया कि चागोस के 2,000 निवासी केवल नारियल बागानों के 'अस्थायी संविदा मजदूर' (transient contract labourers) थे, जिनका कोई स्थायी पैतृक अधिकार नहीं था। हकीकत यह थी कि अधिकांश इलोइस परिवार 1780 के दशक से, जब फ्रांसीसी बागान मालिक मोज़ाम्बिक और मेडागास्कर से गुलाम बनाकर अफ्रीकियों को वहाँ लाए थे, वहीं रह रहे थे। उनकी अपनी बोली (चागोसियन क्रियोल), अपने पारंपरिक कब्रिस्तान, अपने गिरजाघर और अपनी स्वायत्त सामाजिक व्यवस्था थी। इस जीवंत संस्कृति को केवल कागज़ के एक झटके से प्रशासनिक शून्यता में बदल दिया गया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: किसी समुदाय को उसके पैतृक अधिकारों से वंचित करने के लिए औपनिवेशिक नौकरशाही द्वारा दस्तावेजों के व्यवस्थित जालसाजीकरण का यह एक क्लासिक उदाहरण है।
3. डेनिस ग्रीनहिल का आधिकारिक नस्लवाद — अगस्त 1966
ब्रिटिश अभिलेखागार जब दशकों बाद गोपनीय दस्तावेजों की समयसीमा समाप्त होने पर खुले, तो विदेश कार्यालय के शीर्ष अधिकारियों की घिनौनी नस्लीय मानसिकता सार्वजनिक हुई। अमेरिकी रक्षा विभाग ने शर्त रखी थी कि डिएगो गार्सिया को "पूरी तरह से निर्जन" बनाया जाए ताकि सोवियत संघ या मानवाधिकार कार्यकर्ता अड्डे की जासूसी न कर सकें। इस मांग का जवाब देते हुए ब्रिटिश राजनयिकों ने चागोस के नागरिकों की तुलना जंगली जानवरों से की।

सर पॉल गोर-बूथ (विदेश कार्यालय के स्थायी अवर सचिव) ने अगस्त 1966 में लिखा कि उद्देश्य "कुछ चट्टानों को पूरी तरह हमारे नियंत्रण में रखना है, जहाँ पक्षियों के अलावा कोई न हो।" इसके जवाब में 24 अगस्त 1966 को राजनयिक डेनिस ग्रीनहिल (बाद में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य बने लॉर्ड ग्रीनहिल) ने अपनी कुख्यात टिप्पणी दर्ज की, जो साम्राज्यवादी अभिलेखागार के सबसे शर्मनाक बयानों में गिनी जाती है:
"दुर्भाग्य से पक्षियों के साथ-साथ कुछ टार्ज़न या मैन फ्राइडे भी हैं, जिनकी उत्पत्ति अज्ञात है और जिन्हें उम्मीद है कि मॉरीशस आदि में खपा दिया जाएगा।"
— डेनिस ग्रीनहिल, ब्रिटिश विदेश कार्यालय (FOC 16/226, 24 अगस्त 1966)
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह केबल अकाट्य दस्तावेजी साक्ष्य है कि चागोसियों का विस्थापन कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि नस्लवादी उपेक्षा और जानबूझकर किया गया अमानवीयकरण था।
4. पोलारिस मिसाइल छूट: साम्राज्य का गुप्त बहीखाता — दिसंबर 1966
30 दिसंबर 1966 को ब्रिटेन और अमेरिका ने औपचारिक रूप से राजनयिक पत्रों के आदान-प्रदान के माध्यम से डिएगो गार्सिया रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को ब्रिटिश संसद और अमेरिकी कांग्रेस दोनों की नज़रों से जानबूझकर छिपाया गया था, क्योंकि इसमें एक वित्तीय लेन-देन शामिल था जिसे कानूनन सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य था।
पेंटागन ने डिएगो गार्सिया के 50 साल के पट्टे (20 साल के स्वतः विस्तार के विकल्प के साथ) के बदले में ब्रिटेन को कोई सीधा किराया देने के बजाय एक गुप्त छूट दी। अमेरिका ने ब्रिटेन द्वारा खरीदी जा रही 'पोलारिस' सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों की शोध और विकास लागत पर 1.4 करोड़ डॉलर (14 मिलियन डॉलर) माफ कर दिए। ब्रिटिश करदाताओं या चागोसियों को कभी नहीं बताया गया कि एक पूरे समाज की मातृभूमि का सौदा परमाणु हथियारों की तकनीक पर डिस्काउंट हासिल करने के लिए कर दिया गया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह उजागर करता है कि शीत युद्ध के दौर में संप्रभुता और मानवाधिकारों का किस तरह सैन्य हार्डवेयर और गुप्त बहीखातों में सीधे विनिमय किया जाता था।
5. खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति की सुनियोजित नाकाबंदी — 1968–1971
निष्कासन को तुरंत हिंसक बनाने के बजाय, ब्रिटिश प्रशासन ने चागोसियों को धीरे-धीरे आर्थिक और शारीरिक रूप से घुटने टेकने पर मजबूर करने की रणनीति अपनाई। 1968 के बाद से, चागोस द्वीपसमूह का दौरा करने या इलाज के लिए मॉरीशस जाने वाले किसी भी चागोसियन को वापस लौटने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। परिवार विभाजित हो गए; माताएं अपने बच्चों से और पति अपनी पत्नियों से हजारों मील दूर समुद्र पार छूट गए।
जो लोग पेरोस बानहोस, डिएगो गार्सिया और सॉलोमन एटोल पर बचे रहे, उनके जीवन को सुनियोजित रूप से असहनीय बना दिया गया। आपूर्ति जहाजों (जैसे कि आइल डी फराक्वार) की आवाजाही को रोक दिया गया या न्यूनतम कर दिया गया। द्वीपों पर बुनियादी खाद्य पदार्थ—चावल, आटा, नमक, चीनी और मिट्टी का तेल—समाप्त होने दिए गए। चिकित्सा चौकियों को बंद कर दिया गया और डॉक्टरों को वापस बुला लिया गया।
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| चागोस द्वीपसमूह: विस्थापन पूर्व आबादी और निष्कासन आंकड़े |
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| एटोल / द्वीप | 1965 की आबादी | निष्कासन का प्राथमिक वर्ष | सैन्य उपयोग |
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| डिएगो गार्सिया | ~1,000 | 1971 | कैंप जस्टिस नौसैनिक अड्डा|
| पेरोस बानहोस | ~500 | 1972-1973 | वीरान / संरक्षित क्षेत्र |
| सॉलोमन द्वीप | ~400 | 1972-1973 | वीरान / प्रतिबंधित जलक्षेत्र|
| एगमोंट एटोल | ~100 | 1968-1971 | पूर्णतः वीरान |
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यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह रणनीति आधुनिक युद्ध अपराधों की श्रेणी में आती है, जहाँ नागरिक आबादी को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने हेतु भुखमरी और चिकित्सा वंचना को औजार बनाया गया।
6. पालतू कुत्तों का गैस-कक्ष में नरसंहार — अप्रैल 1971
डिएगो गार्सिया पर कब्जा जमाने की अंतिम प्रक्रिया में औपनिवेशिक बर्बरता का वह दृश्य सामने आया जिसने द्वीपवासियों की आत्मा को पूरी तरह तोड़ दिया। 1971 में, सेशेल्स के गवर्नर और बीआईओटी के आयुक्त सर ब्रूस ग्रेटबैच ने आदेश दिया कि डिएगो गार्सिया पर मौजूद सभी पालतू कुत्तों को तुरंत मार दिया जाए।
चागोसियों के लिए उनके कुत्ते केवल जानवर नहीं थे; वे उनके परिवारों के अभिन्न अंग, शिकार के साथी और बच्चों के रक्षक थे। अमेरिकी नौसेना के निर्माण दल (सी-बीज़) की मौजूदगी में ब्रिटिश अधिकारियों ने चागोसियों के पालतू जानवरों को बलपूर्वक छीन लिया। लगभग 1,000 कुत्तों को नारियल के छिलके सुखाने वाले शेड (कोपरा फर्नेस) में बंद कर दिया गया। वहाँ अमेरिकी सैन्य वाहनों के निकास (exhaust) पाइपों से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस छोड़ी गई, जिससे तड़प-तड़पकर वे जानवर मर गए। जो कुत्ते भागने में सफल रहे, उन्हें राइफलों से गोली मार दी गई।
चागोसियन महिलाओं और बच्चों को उनके घरों के भीतर बंद कर दिया गया था, जहाँ से वे अपने प्रिय पालतू जीवों की अंतिम चीखें सुन रहे थे। ब्रूस ग्रेटबैच का संदेश स्पष्ट था: यदि तुम स्वेच्छा से नहीं जाते, तो तुम्हारा भी यही हश्र किया जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह केवल क्रूरता का कृत्य नहीं था, बल्कि आबादी के मनोबल को ध्वस्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया मनोवैज्ञानिक आतंक था।
7. 'नॉर्डवेर' पर अंतिम पशुवत यात्रा — 1971–1973
अंतिम निर्वासन किसी भी मानवीय गरिमा से रहित था। जून 1971 और मई 1973 के बीच, बचे हुए परिवारों को जबरन नॉर्डवेर (Nordvaer) और आइल डी फराक्वार नामक जहाजों पर लाद दिया गया। ये जहाज कोपरा (सूखे नारियल) और उर्वरक ढोने के लिए बने थे, इंसानों के परिवहन के लिए नहीं।
प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक बक्सा या बैग ले जाने की अनुमति दी गई थी। उनका सदियों पुराना फर्नीचर, पालतू जानवर, बकरियां, मुर्गियां, मछली पकड़ने की नावें और पूर्वजों की कब्रें पीछे छूट गईं। लोगों को खुले डेक पर और कोपरा के थैलों के बीच जानवरों की तरह ठूँस दिया गया। मॉरीशस तक की 2,500 मील की छह दिवसीय समुद्री यात्रा के दौरान उल्टियों, खारे पानी और भीषण तूफानों के बीच कोई बुनियादी स्वच्छता सुविधा नहीं थी। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को खुले फर्श पर सोना पड़ा।
चागोस से जबरन निष्कासन का जनसांख्यिकीय पतन (1968-1973)
वर्ष अनुमानित आबादी प्रमुख घटना
1968 |████████████████████| 2,000 (प्रशासनिक नाकाबंदी शुरू)
1970 |███████████████ | 1,500 (पारगमन पर प्रतिबंध, चिकित्सा बंद)
1971 |████████ | 800 (डिएगो गार्सिया खाली कराया गया)
1972 |████ | 400 (सॉलोमन एटोल का निष्कासन)
1973 | | 0 (पेरोस बानहोस पूरी तरह खाली; शून्य आबादी)
जब नॉर्डवेर सितंबर 1971 में पोर्ट लुई, मॉरीशस के बंदरगाह पर पहुंचा, तो जहाज के कप्तान ने ब्रिटिश अधिकारियों को रिपोर्ट दी कि यात्रा के दौरान कई बच्चे बीमार पड़ गए और भारी मानसिक आघात के कारण कई महिलाओं ने अपने गर्भ खो दिए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह 18वीं सदी के अटलांटिक दास जहाजों (Middle Passage) की तर्ज पर 20वीं सदी के उत्तरार्ध में पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों द्वारा प्रायोजित जबरन विस्थापन की बर्बरता को दर्शाता है।
8. पोर्ट लुई की झुग्गियों में परित्याग और 'चैग्रिन' — 1973–1982
मॉरीशस पहुँचने पर चागोसियों को किसी भी प्रकार का सरकारी आवास, शरणार्थी सहायता या पुनर्वास पैकेज नहीं दिया गया। उन्हें पोर्ट लुई के बंदरगाह पर लावारिस उतार दिया गया। द्वीपवासी—जो अब तक मुद्रा-रहित, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में रहते थे जहाँ मछली पकड़ना, नारियल की खेती और सामुदायिक जीवन मुख्य आधार था—अचानक एक विदेशी, पूंजीवादी शहरी समाज में फेंक दिए गए।
वे पोर्ट लुई के सबसे गंदे इलाकों—जैसे 'रोश बोइस' (Roche Bois) और 'कैसिली'—की झुग्गियों में रहने को मजबूर हुए, जहाँ न पीने का पानी था और न ही शौचालय। वे अप्रयुक्त डिब्बों और टिन के शेडों में सोए। स्थानीय आबादी उन्हें हेय दृष्टि से 'आईलॉइस' (जंगली/असभ्य) कहकर पुकारती थी।
1978 तक ब्रिटेन ने प्रति व्यक्ति कुछ सौ पाउंड की नाममात्र राशि मॉरीशस सरकार को दी, जिसका अधिकांश हिस्सा नौकरशाही प्रक्रियाओं में गायब हो गया। समुदाय पूरी तरह से गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी के दुष्चक्र में धकेल दिया गया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह इस औपनिवेशिक मिथक को तोड़ता है कि विस्थापन के बाद पीड़ितों को वित्तीय मुआवजे के ज़रिए 'पुनर्वासित' कर दिया गया था।
9. 'समुद्री संरक्षित क्षेत्र' (MPA): पर्यावरणवाद का औपनिवेशिक हथियार — 2010
जब 1990 और 2000 के दशक में चागोसियन नेता ओलिवियर बैनकॉल्ट और 'चागोस रिफ्यूजी ग्रुप' ने ब्रिटिश अदालतों में वापसी के अधिकार के लिए कानूनी लड़ाइयाँ जीतनी शुरू कीं, तो लंदन के विदेश कार्यालय ने एक नया, परिष्कृत हथियार निकाला: पर्यावरण संरक्षण (Greenwashing)।
अप्रैल 2010 में, ब्रिटिश विदेश सचिव डेविड मिलिबैंड ने चागोस द्वीपसमूह के चारों ओर 545,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को दुनिया का सबसे बड़ा 'समुद्री संरक्षित क्षेत्र' (Marine Protected Area - MPA) घोषित कर दिया। घोषणा में दावा किया गया कि यह प्रवाल भित्तियों और समुद्री जीवों की रक्षा के लिए किया गया है। लेकिन एक शर्त गुप्त रखी गई: इस क्षेत्र में सभी प्रकार के मानवीय निवास और मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध होगा—जिसका सीधा अर्थ था कि चागोसियन कभी अपने द्वीपों पर वापस नहीं लौट सकते थे।
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| चागोस में सैन्यीकरण बनाम मानवाधिकार: एक कड़वी तुलना |
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| मद / श्रेणी | चागोसियन मूल निवासी | अमेरिकी सेना (डिएगो गार्सिया) |
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| वर्तमान आवासीय अधिकार | शून्य (लौटने पर कानूनी रोक) | 3,000-5,000 सैन्य कर्मी |
| पर्यावरणीय प्रभाव | पारंपरिक निर्वाह मछली पकड़ना | परमाणु पनडुब्बी डॉक, बी-52 रनवे|
| बुनियादी सुविधाएं | विस्थापित झुग्गियां | गोल्फ कोर्स, बार, सिनेमा हॉल |
| अंतरराष्ट्रीय कानूनी दर्जा | ICJ द्वारा विस्थापन अवैध घोषित| 2036+ तक निरंतर अमेरिकी लीज |
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इस पाखंड का भंडाफोड़ विकीलीक्स द्वारा जारी 2009 के एक अमेरिकी राजनयिक केबल से हुआ। अमेरिकी दूतावास के राजनीतिक परामर्शदाता कॉलिन रॉबर्ट्स ने विदेश कार्यालय के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद लिखा:
"ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, एक समुद्री पार्क की स्थापना से द्वीप के पूर्व निवासियों के पुनर्वास के दावों को हमेशा के लिए दफन किया जा सकता है... उनके अनुसार, पर्यावरण लॉबी इस कदम का पुरजोर समर्थन करेगी और इलोइस के पास कोई तर्क नहीं बचेगा।"
— अमेरिकी विदेश विभाग केबल (09LONDON1156_a, 15 मई 2009)
डिएगो गार्सिया पर स्थित अमेरिकी सैन्य बेस—जिसमें विशाल कंक्रीट रनवे, परमाणु पनडुब्बियों के लिए गहरे पानी के डॉक, और हजारों सैनिकों के लिए गोल्फ कोर्स शामिल थे—को इस 'पर्यावरण संरक्षण' क्षेत्र से पूरी तरह छूट दी गई थी। केवल गरीब काले और भूरे मूल निवासियों को पर्यावरण के लिए 'खतरा' करार दिया गया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: इसने उजागर किया कि कैसे आधुनिक युग में 'हरित पर्यावरणवाद' को मूल निवासियों के अधिकारों को कुचलने और औपनिवेशिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए एक आवरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
10. हेग की अवमानना और 2024 का अधूरा समझौता — 2019–2024
दशकों के संघर्ष के बाद, चागोस का मामला आखिरकार वैश्विक न्याय के सबसे ऊंचे मंच पर पहुंचा। फरवरी 2019 में, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने 13-1 के ऐतिहासिक बहुमत से एक सलाहकार राय जारी की। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि 1965 में चागोस का विच्छेदन अवैध था, ब्रिटेन का प्रशासन एक जारी रहने वाला अंतरराष्ट्रीय गलत कृत्य (internationally wrongful act) है, और ब्रिटेन को जितनी जल्दी हो सके चागोस द्वीप समूह का प्रशासन मॉरीशस को सौंपना चाहिए।
उसी वर्ष मई 2019 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारी बहुमत (116 देशों के समर्थन और केवल 6 के विरोध) से एक प्रस्ताव पारित कर ब्रिटेन को द्वीप खाली करने के लिए छह महीने की समयसीमा दी। ब्रिटेन ने इस प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया कि ICJ की राय केवल 'सलाहकारी' है।
अक्टूबर 2024 में, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक अलगाव के बाद, ब्रिटेन के नवनिर्वाचित लेबर प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने मॉरीशस के साथ एक समझौते की घोषणा की। ब्रिटेन ने चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता देने पर सहमति जताई, लेकिन इसमें एक ऐसा क्लॉज शामिल किया गया जिसने चागोसियों के जख्मों पर फिर से नमक छिड़क दिया: डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का संचालन कम से कम अगले 99 वर्षों तक ब्रिटेन और अमेरिका के हाथ में ही रहेगा।
इस समझौते में चागोसियन समुदाय के प्रतिनिधियों को बातचीत की मेज पर शामिल नहीं किया गया। समझौते के तहत चागोसियों को डिएगो गार्सिया को छोड़कर बाकी छोटे द्वीपों पर लौटने की अनुमति देने की बात कही गई है, लेकिन सबसे उपजाऊ, बड़ा और रहने योग्य द्वीप—डिएगो गार्सिया—उनके लिए हमेशा के लिए निषिद्ध रहेगा।
"हमारी मातृभूमि का फैसला हमारे बिना ही कर दिया गया। एक बार फिर, महाशक्तियों ने हमारी किस्मत का फैसला बंद कमरों में बैठकर किया है।"
— ओलिवियर बैनकॉल्ट, नेता, चागोस रिफ्यूजी ग्रुप (अक्टूबर 2024)
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यह दर्शाता है कि 21वीं सदी में भी, वैश्विक सुरक्षा और सैन्य गठबंधनों के नाम पर मूल निवासियों की संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार को साम्राज्यवादी प्राथमिकताओं के नीचे दबा दिया जाता है।
प्रमुख निष्कासन अभियानों के चरण
- चरण I (1965–1968): सूचना का गुप्त विलोपन, मॉरीशस का विभाजन, और द्वीपों पर नए आगंतुकों के प्रवेश पर प्रशासनिक प्रतिबंध।
- चरण II (1968–1970): यात्रा करने वाले निवासियों के लौटने पर पूर्ण रोक, राशन में कटौती, और चिकित्सा केंद्रों का विघटन।
- चरण III (1971): डिएगो गार्सिया का पूर्ण सैन्यीकरण, पालतू जानवरों का सामूहिक संहार, और पहली बड़ी आबादी का बलपूर्वक निर्वासन।
- चरण IV (1972–1973): पेरोस बानहोस और सॉलोमन से अंतिम निवासियों का नॉर्डवेर मालवाहक जहाज द्वारा हिंसक विस्थापन।
- चरण V (2010–वर्तमान): पर्यावरण संरक्षण (MPA) और द्विपक्षीय संप्रभुता संधियों के माध्यम से चागोसियों की वापसी को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना।
यह सूची कैसे तैयार की गई
इस सूची का निर्माण ब्रिटिश नेशनल आर्काइव्स (केव, लंदन) से अवर्गीकृत (declassified) फाइलों, विशेष रूप से विदेश और राष्ट्रमंडल कार्यालय (FCO 16 और FCO 31 श्रृंखला) के पत्राचार के गहन विश्लेषण पर आधारित है। इसमें 2019 के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के सलाहकार निर्णय Legal Consequences of the Separation of the Chagos Archipelago from Mauritius in 1965 के न्यायिक रिकॉर्ड, संयुक्त राष्ट्र महासभा के आधिकारिक कार्यवृत्त, और विस्थापन के चश्मदीद गवाहों—जैसे चागोस रिफ्यूजी ग्रुप के संस्थापक सदस्यों—के मौखिक साक्ष्यों को प्राथमिक स्रोत के रूप में संकलित किया गया है। विकीलीक्स द्वारा जारी किए गए अमेरिकी कूटनीतिक केबलों ने पर्यावरण के नाम पर गढ़े गए कानूनी प्रपंचों की पुष्टि की है।
Sources & further reading
- International Court of Justice (2019) — Advisory Opinion on the Legal Consequences of the Separation of the Chagos Archipelago
- The Guardian (2004) — Britain's shameful expulsion of the Chagossians: The secret history
- Vine, David (2009) — Island of Shame: The Secret History of the U.S. Military Base on Diego Garcia, Princeton University Press
- United Nations General Assembly — Resolution 73/295 on the Chagos Archipelago (2019)
- Pilger, John (2004) — Stealing a Nation (Documentary, ITV)
- Human Rights Watch (2023) — That’s When the Nightmare Started: UK and US Crimes Against Humanity in the Chagos Archipelago
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- चागोस द्वीप समूह में ब्रिटेन और अमेरिका ने क्या किया था?
- 1965 से 1973 के बीच, ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया में अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थापित करने के लिए पूरे चागोसियन (इलोइस) समाज को उनके घरों से बलपूर्वक निष्कासित कर दिया। लगभग 2,000 लोगों को पशु-वाहक जहाजों में भरकर मॉरीशस और सेशेल्स की झुग्गियों में फेंक दिया गया, और उनकी बस्तियों तथा पालतू जानवरों को नष्ट कर दिया गया।
- इस निष्कासन के मुख्य योजनाकार कौन थे?
- इस अभियान की रूपरेखा ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन की लेबर सरकार, विदेश कार्यालय के शीर्ष नौकरशाहों (जैसे सर पॉल गोर-बूथ और डेनिस ग्रीनहिल), तथा वाशिंगटन में अमेरिकी रक्षा विभाग और एडमिरल एल्मो जुमवाल्ट द्वारा तैयार की गई थी। मॉरीशस में ब्रिटिश प्रशासक ब्रूस ग्रेटबैच ने निष्कासन को बर्बरतापूर्वक ज़मीन पर लागू किया।
- चागोस निष्कासन में कितने लोग प्रभावित हुए?
- कुल मिलाकर 1,500 से 2,000 प्रत्यक्ष निवासी प्रत्यक्ष विस्थापन का शिकार हुए। उनके हजारों वंशज आज मॉरीशस, सेशेल्स और ब्रिटेन (क्रॉली) में निर्वासित हैं। विस्थापन के दौरान भुखमरी, चिकित्सा की कमी और विस्थापन जनित अवसाद (चैग्रिन) के कारण दर्जनों नवजात शिशुओं और बुजुर्गों की अकाल मृत्यु दर्ज की गई।
- ब्रिटिश सरकार ने इस निष्कासन को कानूनी रूप से कैसे छिपाया?
- ब्रिटेन ने चागोसियों को द्वीप का 'स्थायी मूल निवासी' मानने से आधिकारिक तौर पर इनकार किया और उन्हें केवल नारियल बागानों के 'अस्थायी अनुबंध श्रमिक' के रूप में पेश किया। 2010 में ब्रिटेन ने चागोस के चारों ओर एक 'समुद्री संरक्षित क्षेत्र' (MPA) घोषित किया, जो विकीलीक्स के अनुसार द्वीपवासियों की वापसी को हमेशा के लिए रोकने का एक पर्यावरण-दिखावा था।
- क्या चागोसियों को कभी वापस लौटने की अनुमति मिली?
- नहीं। 2019 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ब्रिटेन को चागोस खाली करने का आदेश दिया। अक्टूबर 2024 में ब्रिटेन ने मॉरीशस को संप्रभुता सौंपने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को 99 साल के पट्टे पर बरकरार रखा, जिससे सबसे बड़े द्वीप पर चागोसियों की वापसी का अधिकार अभी भी प्रतिबंधित है।